Monday, November 4, 2013

रूहानी रोमांस.....

दोस्तों ,

मैं अपने तमाम चाहने वालो का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जो मेरे साथ मेरे साहित्यिक सफ़र में शुरू से रहे है , वो सारे ब्लॉगर मित्र , जिन्होंने मुझे अपने कमेंट्स, अपने विचार , अपनी सोच से मेरा हौसला भी बढ़ाया और मेरा मार्गदर्शन भी किया . आप सभी  के कारण ही मैं कविता से कहानी की विधा में भी प्रवेश किया है . मुझे आप सभी मित्रो का प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त है . और साथ ही ईश्वर की कृपादृष्टि से मेरे समय के कुछ महान साहित्यका , जैसे हिमांशु जोशी, प्राण शर्मा , इमरोज़ तथा देश –विदेश में बसे कई साहित्यकार भी मुझे और मेरे लेखन को पसंद करते है .मैं इसे भगवान का प्रसाद ही समझता हूँ कि जिन्हें मैं कभी पढता था; वही सद्गुरु आज मेरी कविताएं और मेरी कहानियो को पसंद करते है . मैं घुटनों के बल बैठकर इन सभी ब्लॉगर और साहित्यकारो को धन्यवाद देता हूँ .

लेकिन दो दिन पहले एक कमेंट मिला, मेरी कहानी आंठ्वी सीढ़ी पर. और जब मैंने उसे पढ़ा तो थोडा चौंका, वहाँ लिखा था, “Please see my blog for reply ” मैं उस ब्लॉग पर पहुंचा तो वहां ये कमेंट था “Vijayaji. I liked reading your story. Your main character is a little too bhavuk for my taste, but her sorrow and loss is legitimate. Looking forward to seeing more of your writing.”

मैंने ध्यान से पढ़ा तो देखा, ये कमेंट उषा प्रियवंदा जी ने दिया था . जी हां वही उषा प्रियवंदा जी , जिनके उपन्यास “ पचपन खम्बे लाल दीवारें “ ने मुझे पागल सा कर दिया था और मैं बाद में जब उसे दूरदर्शन पर देखा तो और पागल हो गया था. मीता वशिष्ठ की अदाकारी में पता नहीं क्या बात थी .मन कुछ विचलित सा हो गया था . मैंने तब ये प्रण किया था अपने आप से कि अगर कभी लिखूंगा तो अपनी कविताओ में और अपनी कहानियो में इसी तरह का रूहानी रोमांस को डालूँगा. और मैंने वही किया भी और पिछले पांच सालो से मेरी नज्मे और अब कहानियो में यही रूहानी रोमांस दिखाई पड़ता है. उन्होंने और से लिखा “Agar dil meN chaah hai to aisa hi hoga. Likhate rahiye. Aapka apna syle hai.”

जाने अनजाने में गुरु द्रोणाचार्य बने उषा जी को मेरा प्रणाम .
और अपने आप से ये वादा कि और लिखूंगा ! बेहतर ! और आप सभी के लिए लिखूंगा!

आपका अपना
विजय