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Wednesday, March 8, 2017

स्त्री

स्त्री का कोई एक दिन ही नहीं होता है. मनुष्य के इतिहास में जन्म से लेकर मरण तक स्त्री की कई रूपों में भूमिका रही है और हमेशा ही रहेंगी .हर दिन ही स्त्री का है . जीवन ही स्त्री का है . स्त्री ,परमात्मा का परम अंश है . स्त्री है तो हम सब है . संसार की सभी नारियों को मेरे प्रणाम !

विजय 

Wednesday, April 24, 2013

समाज



दोस्तों , समस्या समाज की है . 

समाज में जो एक अजीब सी कुंठा , विकृति , और रोगी मानसिकता है , उसका इलाज करना है , और ये संभव होंगा . अपने आसपास के परिवेश को एक नयी नज़र से देखने से. और साथ में ही , समाज सुधारको को आगे आकर इन कुंठाओं को समाप्त करने की कोशिश करनी चाहिए . 

ये बहुत आश्चर्य की बात है , कि जिस देश ने कामसूत्र को निर्माण किया वहां इस तरह की विकृति बसी हुई है और बीते बरसो में ये विकृति बढ़ी ही है . और इसका मुख्य कारण openness to internet for various obscene sites , extreme advertisements and skinny roles of woman in our films.

कल एक मित्र से बात हो रही थी, उसने कहा कि अगर इस देश में prostitution को legal कर दिया जाए तो , जो instant physical urge होती है / होंगी , उसे address किया जा सकेंगा . और इससे ये होंगा कि जो soft targets इन वहशियों का शिकार बन रहे है , उन हादसों में कमी आएँगी. 

एक दूसरा मित्र ने कहा कि इन गुनाहगारो को अगर खुलेआम फांसी दिया जाए और उसे हर में broadcast किया जाए तो दुसरे लोगो में एक डर का माहौल बनेंगा और दुसरे लोग इस तरह के कार्य करने से पहले सोचेंगे.

हमें स्कूल और कॉलेज में लडकियों के लिए martial arts  को जरुरी बनाना होंगा. इन जानवरों से बचने के उपाय खोजने होंगे . खुद की रक्षा अब खुद ही करना होंगा .

जो भी हो , इस देश को बदलना होंगा . और social networking के जरिये हम सब बहुत बड़ा impact इस society में create कर सकते है . 

आपके विचारों का स्वागत है मित्रो. [ कृपया शब्दों की मर्यादा बरते ] 
धन्यवाद 
विजय

Sunday, April 21, 2013

नैतिक मूल्य


दोस्तों , मुझे तो समझ में नहीं आता कि हम किस तरह के sick society में जी रहे है. आखिरकार , हमें हो क्या गया है , क्या हमारे नैतिक मूल्य इतने नीचे गिर गए है .एक छोटी सी बच्ची ! 
मुझे याद नहीं आता है कि पिछले १५-२० सालो में हमने  इस तरह की हैवानियत नहीं देखि है ... बीतते समय के साथ हम जानवर से भी बदतर होते जा रहे है. 
समय तो आ गया है की , हम खुद ही  प्रचार प्रसार करके इस system  को बदले. 
ईश्वर उस बच्ची को जीने की ताक़त दे. 
अमीन !!!

Saturday, December 29, 2012

वैसे , मरा कौन है ?

वैसे , मरा कौन है ? 
वो बच्ची , दामिनी , निर्भया तो नहीं मरी . निश्चिंत ही . वो तो सदा ही जीवित रहेंगी हमारे बीच , हमेशा ही . 
बल्कि 
मरे तो हम सब है , ये समाज है , ये देश है , यहाँ का कानून है , यहाँ की सरकार है , यहाँ का total system है , यहाँ की सोच मर गयी है . और तो और , यहाँ का सच्चा पुरुष ही मर गया है .

Wednesday, December 19, 2012

बलात्कार

मैंने कभी नहीं सुना या पढ़ा कि जानवर बलात्कार करते है. ये सब "शुभ" कार्य , सिर्फ हम इंसान ही करते है . शर्म आती है मुझे . क्या हम जानवरों से भी गए गुजरे है . हमारी मानसिकता कितनी घृणित हो चुकी है . हैरत की बात ये है की उत्तर भारत में ये ज्यादा हो रहे है . समस्या कुछ और है . एक total mental  overhaul की जरुरत है . 

Saturday, June 9, 2012

ईश्वर

ईश्वर जरुर एक स्त्री है ...वह इतना दयालु जो है .