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Saturday, February 13, 2016

यह देश !!!

आजकल देश ऐसा हो गया है कि क्या कहे.. 
न न्यूसपेपर देखने का मन होता है न न्यूज़चैनेल देखने का मन होता है...
एक अच्छे खासे देश की कुछ लोगो ने अपना दो कौड़ी का दिमाग लगा कर ऐसी तैसी कर दी है... जहाँ देखो ... एक अजीब सा जूनून और पागलपन.......
अरे यहाँ लोगो को दो वक़्त की रोटी ठीक से कमाई नहीं जाती और ये हैै कि देश में हल्ला मचाये हुए है... और ऊपर से बड़ी बात ये कि सभी पढ़े लिखे है ......
विजय



#भारतमेरादेश , #मानवकापागलपन , #विजयकुमारसप्पत्ति , #3amwriting

Wednesday, December 16, 2015

निर्भया

निर्भया , पता नहीं तुम किस आसमान में हो...
लेकिन मैं तुम्हे बता दू कि यहाँ तुम्हारे देश में कुछ भी नहीं बदला है...
सब कुछ वैसे ही है.. आज भी बलात्कार होते ही रहते है......लोग छूट जाते है..
और तो और वो दरिंदा जिसने सबसे ज्यादा अत्याचार तुम पर किये थे.. वो भी छूट रहा है..
ये देश और इस देश का कानून .....!!!
लडकियां आज भी आदमी नाम के वहशी जानवर से डरती है..
आदमियों को आज भी लड़कियों में सिर्फ गोश्त नज़र आता है..
कहने का मतलब ये है कि देश वैसा ही है और उससे भी बदतर होते जारहा है.. जैसा तुम छोड़कर गयी थी..
और कुछ कहने के लिए न मन है और न ही शब्द....
बस .. आज मन हुआ तो तुम्हे याद कर लिया........

विजय

© विजय का 3 AM लेखन


Saturday, March 23, 2013

शहादत


बहुत बरस हुए .... कुछ बावरे युवाओ ने आज के दिन , इस देश के लिए फांसी को चुना !  वैसे वो काल अलग था . लेकिन आज भी वही युग है . बस कुछ नहीं है तो वो जज्बा जो देश के लिए उस वक़्त के युवाओ में था.......


भगतसिंग ने अपनी जेल डायरी में लिखा था , ‘‘तुझे जिबह करने की खुशी और मुझे मरने का शौक है मेरी भी मर्जी वही जो मेरे सैयाद की है...’’

देश के आजाद होने से लेकर आज तक की पूरी सामाजिक प्रक्रिया में बहुत से बदलाव आये है . लेकिन देश , अफ़सोस कि , नहीं  बदल सका.  कहीं तो कोई चूक हुई है  .. चाहे वो हुक्मरानों से  हुई हो या फिर इस देश की दो पीढ़ीयों से .

पता नहीं ....दिल में बड़ा दर्द होता है ...... ये सोचकर कि , कहीं उनकी शहादत बेवजह तो नहीं हुई...!!