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Sunday, August 31, 2014

अमृता प्रीतम

कई बाते ऐसी होती हैं की उन्हें लफ्जो की सजा नहीं देनी चाहिए...
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अमृता प्रीतम

अमृता , यदि आप न होती तो मेरी मुलाकात लफ्जों से नहीं होती. और न ही मैं आज कवि या कहानीकार होता . मेरे अलफ़ाज़ भी बस आपके ही कलम के हमसाया है . एक मुलाकात जो आपसे की है वो बस इस जन्म के लिए बहुत कुछ है . जन्मदिन मुबारका जी...!



Sunday, March 2, 2014

मौन

मैंने अपने भीतर के मौन को सूनी रातो में जागकर शब्दों में बदला है .
क्या तुम उन शब्दों में मौजूद मेरे मौन को सुन सकते हो .


ये वो मौन है जो अब हमेशा हमारे दरमियान रहेगा !

दरअसल ये वो मौन भी है जो हज़ारो सालो से हम जैसो के दरमियान रहा है .
मैं तो बस उस मौन की कश्ती का माझी हूँ .

हां ! ये कश्ती तुम्हारी है . नदी के इस पार मैं रहता हूँ . और उस पार तुम !

तुम नाम जानना चाहते हो . जान लो . नदी का नाम ज़िन्दगी है . कश्ती का नाम मोहब्बत है . माझी मैं हूँ और तुम ?

कौन हो तुम ?

Friday, August 2, 2013

प्रेम

प्रेम हमेशा ही अधुरा होता है . जिसे हम पूर्णता समझते है  , वो कभी भी प्रेम नहीं हो सकता . प्रेम का कैनवास इतना बड़ा होता है कि एक ज़िन्दगी भी उसमे समा नहीं जा सकती है . इसी ज़िन्दगी और प्रेम के युद्ध में अक्सर ही ज़िन्दगी की जीत [ ? ] होती है .   और प्रेम की हार [ ? ] - प्रश्न चिन्ह इसलिए है कि , हार -जीत की परिभाषा हम सब के लिए इस विषय में अलग अलग होती है . 

प्रेम -एक जीवन में जिया गया सबसे खूबसूरत अनुभव होता है . 

Sunday, March 3, 2013

काश

ये जो काश है न , वो दुनिया को हमेशा दो टुकडो में बाँट देता है .. क्या करे.. कुछ भी समझ नहीं आता है .. बस ईश्वर से एक प्रार्थना है कि वो दुनिया के दुसरे हिस्से के बन्दों को और मजबूती दे.