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Friday, March 10, 2017

क्षितिझ

मिलना मुझे तुम उस क्षितिझ पर
जहाँ सूरज डूब रहा हो लाल रंग में
जहाँ नीली नदी बह रही हो चुपचाप
और मैं आऊँ निशिगंधा के सफ़ेद खुशबु के साथ
और तुम पहने रहना एक सफेद साड़ी 
जो रात को सुबह बना दे इस ज़िन्दगी भर के लिए
मैं आऊंगा जरूर ।
तुम बस बता दो वो क्षितिझ है कहाँ प्रिय ।
वि ज य

Tuesday, September 22, 2015

प्रेम

प्रेम एक अंतहीन यात्रा और प्रतीक्षा ही तो है .....जो इस प्रतीक्षा को जी जाते है और यात्रा को पूरी करते है ; वो दुनिया से हार जाते है. और जो दुनिया से जीत जाते है वो क्या जाने कि प्रेम क्या है और उसकी यात्रा और प्रतीक्षा क्या है........!!!!
© विजय

Thursday, March 13, 2014

दुनिया, तुम और मैं !!!

दुनिया भर घूम आते हो 
दुनिया को जी भर कर देखते हो 
दुनिया से बाते करते रहते हो ....

.......कभी उस मोड़ पर भी चले आओ.....जहाँ हम खड़े है 
……….कभी हमें भी जी भर कर देख लो …….आँखे तुम्हारा इन्तजार करती रहती है 
………कभी एक लफ्ज़ हमारे नाम कर दो .......मन तुम्हे सुनने को तरस रहा है 

और फिर..... दुनिया के पास वो निगाहें कहाँ जो हमारे पास है !
और दुनिया के पास वो अलफ़ाज़ कहाँ जो हमारे दिल में है !
और इस फानी दुनिया के पास वो आगोश कहाँ जो हमारे बांहों में है !

....choice is all yours boss !
all you have to remember that YOU live only once ....!

या तो इस तरह जी लो या फिर उस तरह ही जी जाओ , जो जी रहे हो .
फर्क बहुत मामूली है , उस जहान में मैं नहीं और इस जहान में मेरे सिवा कुछ भी नहीं ..!

Tuesday, August 20, 2013

प्रेम की राह

कभी कभी जीतना ज्यादा जरुरी नही होता है ...
जीना भी आना चाहिए ;
और अक्सर प्रेम की राह पर जीते हुए हारा जाता है .
हां ! सच्ची ! तुम्हारी कसम !!!