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Sunday, June 9, 2013

मैं , शब्द , सपने और साँसे ............

मेरे और शब्दों में अब एक रिश्ता बन गया है .... 
मैं रहूँ या न भी रहूँ.....मेरे शब्द हमेशा रहेंगे ....
सच में .. 

किसी सपने में एक जोगी ने कहा था ..
कुछ नज़्म लिख लो यार 
चाँद सांसे मैं उधार दे दूंगा .. 
अब तलक उस जोगी की साँसे चल रही है ,
खुदा जाने , कब उसकी साँसे ख़त्म होंगी 
और कब मेरी कलम रुकेंगी !
खुदा जाने ...

Friday, May 10, 2013

प्रेम



प्रेम अलग है , जीवन अलग है , समाज अलग है , प्रेम इन सब बातो से परे है , ऊपर है . सर्वोच्च है . प्रेम की अपनी ही बानगी है और अपना ही एक अलग जीवन , प्रेम इस समाज से परे एक और नए समाज में जीता है . प्रेम की असफलता के कई कारण हो सकते है , पर प्रेम के होने का एक ही कारण है और वो होता है सिर्फ प्रेम... और संसार की प्रेम कहानिया गवाह है की , प्रेम ने समाज को अपना नहीं समझा और समाज ने भी प्रेम को नहीं अपनाया .... लेकिन प्रेम की सफलता या असफलता ही ज़िन्दगी का जीने का आसरा बनता है .. ऐसा मेरा मानना है .

Friday, December 28, 2012

समाज

आओ मित्रो , कुछ बेहतर रचे , ताकि एक नया बदलाव समाज में आये . एक नयी सोच का जन्म हो . जीवन की गति को नए पंख चाहिए अब . प्रेम और मित्रता की शाश्वतता ही नए अंकुर को जन्म देंगी .

Wednesday, August 8, 2012

बिछड़ कर

मुझसे बिछड़ कर खुश रहते हो......
..................मेरी तरह तुम भी झूठे हो.....!!!!!

Wednesday, June 6, 2012

कलम

पाकिस्थान के एक शायर मजहर -उल - इस्लाम ने कभी लिखा था :

ऐ खुदा ! अदीबो के कहानियो और कलमो में
सच्चाई , अमन और मोहब्बत उतार !
ऐ खुदा ! लालटेन की रौशनी में लिखी हुई
इस दुआ को कबूल कर !

आईये दोस्तों , हम अपनी कलम में सिर्फ दोस्ती और प्यार का रंग भरे !

Sunday, May 20, 2012

यादे

कभी कभी यादे बहुत सताती है ......इतना ज्यादा कि
लगता है जिंदगी एक फैसला कर ही ले ...
या तो यादे या तो जिंदगी .....
क्योंकि जब यादे ;
याद आती है तो जीने की कोई वजह समझ नहीं आती ..

Friday, May 18, 2012

सपने

जीवन में अब बहुत कुछ की उम्मीद नहीं है ,पर हाँ ;
सपने है एक नयी बदलती दुनिया के , एक बेहतर और खूबसूरत दुनिया के ,
कविता के , अक्षरों के , अल्फाज के ध्वनि के ,
फूलो के , बादलों के, चाँद के ,
किताबो के , संगीत के ,
बस सपने ही सपने है और इन्ही सपने पर मेरी साँसे चल रही है ........

Wednesday, May 9, 2012

चाँद

ये जो चाँद है न ,वो रात को निकलता है .....!!
वैसे तो चाँद हर रोज निकलता है , पर कभी कभी अमावस आ जाती है ......
और इस बार की अमावस अब खत्म नहीं होंगी कभी .....!

Wednesday, April 25, 2012

इंसान

जैसे उगते हुए सूरज को बार बार देखना ,जैसे कुछ अच्छी फिल्मो को कई बार देखना , जैसे प्रेमिका का चेहरा बार बार देखना ,जैसे सोते हुए बच्चे को लाड करना ,जैसे मनपसंद गानों को हज़ार बार सुनना , जैसे अपनी ही लिखी कविता को बार बार पढ़ना और नए अर्थ खोजना ....कुछ बाते जिंदगी बार repeat करो , फिर भी इंसान थकता नहीं है .. ...

Sunday, April 22, 2012

प्रेम

प्रेम की व्यापकता बहुत बड़ी होती है , इतनी की उसमे जग समा जाए . और हर किसी के लिये प्रेम के मायने, आयाम, अनुभव और मतलब अलग लगा ही होते है .

Monday, March 26, 2012

बस यूँ ही.......

बस यूँ ही.......
कभी कभी ...
सोचता हूँ.......
और अपनी सोच को शब्दों में ढालता हूँ....
और शब्द ही यहाँ  मेरे मौन का परिचय है !!!